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Monday, March 8, 2010

तू मिला था मिली थी वो जन्नत मुझे

तूने कहा था मुझसे
मैं वोह हूँ, जो सारी दुनिया को छोड़ के आ जाउंगी
तू आ जाये तो आज भी मैं छोड़ दूं दुनिया सारी...

कोई प्यार ऐसा नहीं होता कि इतना पूरा लगे
ज़मीं और आसमा मिल के एक होने लगें
कहते हैं वहां शायद, सब सपने सच हो जाते हैं
तू भूल गयी, बहती नदी और उसके पास, घर अपना...

तेरी हंसी में अब भी खो सकती हूँ मैं
तेरी बे-बात बातें सौ जनम तक सुन सकती हूँ
रोज़ गा सकती हूँ मैं तेरे लिए, आधी रात की इस जिद पर
'मुझे गाना सुना; अभी सुना; सुना ना..'

तेरे हाथों का स्पर्श, अब भी याद है मुझको
तेरी आँखों से कही हर एक बात... बे-शब्द कहाँ?
कोई मंज़र था अगर, जब मैं सचमुच जीना चाहती थी...
तेरे साथ था...

तूने कहा था मुझसे
मैं वोह हूँ, जो सारी दुनिया को छोड़ के आ जाउंगी
तू आ जाये तो आज भी मैं छोड़ दूं दुनिया सारी...

तू मिला था मिली थी वो जन्नत मुझे...