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Monday, March 8, 2010

मैं जहाँ हूँ वहां बस यह सच है

मैं तुझसे क्या कहूं
नादान तो नहीं ही है
वह जिस में बह कर ढूँढ़ते थे किनारे कभी
आज लगता है बिन किनारे ही
कुछ देर बह लें बस
प्यार से ज़रूरी प्यार का अहसास भर है
मैं जहाँ हूँ वहां बस यह सच है
तू जहाँ है
अब भी प्यार बस्ता है वहां
और तेरे अहसास पे सर झुकाती हूँ
मगर फिर, चुप हो जाती हूँ

कोई ख्वाब कभी याद आता है
किसी अतीत की आवाज़ में
किसी कल की पुकार ढूँढने लगती हूँ
कभी खो जाती हूँ उसमे जो जिया गया ही नहीं
कभी फलसफे लिखती हूँ बीते कल पर
मैं आज में जीती ही कहाँ हूँ?
और फिर क्यों जियूं? किसके लिए जियूं?
लेकिन यह वह, जिसके लिए जीना होता है
यूँ नहीं है
की मैं बीत गयी हूँ कहीं

प्यार से ज़रूरी प्यार का अहसास भर है
तू जहाँ है
अब भी प्यार बस्ता है वहां
और तेरे अहसास पे सर झुकाती हूँ
मगर फिर, चुप हो जाती हूँ

प्यार से ज़रूरी प्यार का अहसास भर है
मैं जहाँ हूँ वहां बस यह सच है