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Sunday, March 21, 2010

The same universe

(Somewhere)
It is peaceful.
You and I are a part of the same universe and merge in the same universe
You and I are therefore not separate.
I do not need to reach out to you and you do not need to find me.
We exist in the same being,
take the same breath
breathe the same life.

Somewhere there is the feeling of a twinge,
a sudden sharp pain, except, that it is neither sudden nor sharp.
I acknowledge it, but I cannot assign meaning to it.
I realize it is the pain of stepping 'out'
of the collective consciousness.
It is the pain of 'need' and 'want' and 'do not have'
It is the pain of 'cannot love' or 'cannot be loved' or both

(Inside, it was just love -
You and I were a part of the same universe
and merged in the same universe.)

मुझसे लकीर नहीं बन रही

यह क्या जी रही हूँ मैं?

एक ख्याल के सच होने के लिए
लड़ते लड़ते थक गयी थी
सोच रही थी बस अब थकान ही है
लडाई ख़त्म हो चली है
कि मुझमे लड़ने की,
विश्वास करने की, और प्यार..
क्षमता ख़त्म हो चली है

यह कहाँ से आ गए तुम?

मैं परियों में और जादू में विश्वास करती हूँ
महसूस होती है मुझे जमीन, आसमान, हवा, बारिश और धड़कने
गानों में, शब्दों में, और दुनिया बदल जाने में
दुनिया बदल पाने में भी, विश्वास है मुझे
टूटता बिखरता सा दीखता है अभी लेकिन
इस विश्वास को सालों जिया है मैंने

मगर तुम?

आसमान में घुमते किसी गृह से प्यार हो गया है मुझे
और मेरे पास कोई अंतरिक्ष यान नहीं
वैसा वाला तो शायाद बना भी नहीं
क्या करूं मगर?
तुम्हे देखते, महसूस करते, जीते हुए,
मुझे याद ही नहीं रहता की तुम
आसमान में घूमता कोई गृह हो, या उससे भी दूर कोई तारा
और मैं पृथ्वी पर बंधी इंसान भर हूँ
तुम कभी अपना यान लेकर यहाँ पहुंचे भी
तो अनगिनत चहरों में मेरा चहरा पहचानोगे कैसे?
ढूँढोगे कैसे मुझे?

विश्वास?
अब से पहले इतना मुश्किल नहीं था
परियों में और जादू में, जमीन, आसमान, हवा, बारिश और धडकनों में
गानों में, शब्दों में, और दुनिया बदल जाने में
दुनिया बदल पाने में
विश्वास
इतना मुश्किल नहीं था...

मैं जानती हूँ की बस सिर्फ केवल विश्वास की सुनहरा धागा पकड़ कर
तुम मुझ तक पहुच सकते हो
तुम जब आओगे, तुम्हारी नज़रें बस यह एक पतली सी डोर ढूँढ रही होगी
आसमान में खिंची यह एक लकीर

और मुझसे यह लकीर ही नहीं बन रही
और मुझसे यह लकीर ही नहीं बन रही....

Saturday, March 20, 2010

इंतज़ार

कभी करते हुए इंतज़ार तुम्हारा अगर
मैं थक के बैठ जाऊं कहीं
तुम्हे लगे, अब मैं
तुम्हारा इंतज़ार नहीं कर रही

कुछ बात न करूं तुमसे,
कुछ न कहने को हो न सुनने को
करोड़ों शब्दों की बकबक के बाद
एक दम ख़ामोशी मिले

अगर तुम्हे लगे - अजीब सा
जैसे कभी वक़्त बीत जाता है

याद करना जनम दर जनम सदी दर सदी
मैं बस प्यार किया है तुमसे, और इंतज़ार
अब आओगे, अब आओगे, अब आओगे...

मेरे शब्द तो कहीं चार जनम पहले ही बीत गए
और कुछ सोल्हा जन्मों से थकी हूँ
पिछले सात जन्मों से हारी हुई हूँ
उनमे से तीन में बडबडाती रही
और चार, चुप पड़ गयी

तुम्हे लग रहा है मुझे इंतज़ार नहीं, प्यार नहीं?
शायद जीता जगता इंसान ही नहीं वहां, जहाँ मैं थी

छुओ उस पत्थर को, थामे रहो थोड़ी सी देर
कुछ गर्मास मिलेगी तो पिघल जायेगा
मैं बस इस उम्मीद पे जिंदा हूँ
तुम आओगे, फिर से जीना भी आ जायेगा |

Thursday, March 18, 2010

कहाँ?

अनजानी उमीदों पे खड़ा सफ़र,
खड़ा है रूककर?
या चलता जा रहा है?
मैं कहाँ जा रही हूँ?
या खड़ी हूँ?
कहाँ?

सवाल कुछ ऐसे हैं
क्या मैं पानी पे चल पाउंगी?
क्या गिरते गिरते गिरना भूल कर कभी
उड़ने लग जाउंगी?
क्या तुम्हे मेरा अहसास भर भी है?
हो तो क्या? और न हो तो क्या?
क्या मैं पानी पे चल पाउंगी?
क्या गिरते गिरते गिरना भूल कर कभी
उड़ने लग जाउंगी?

Wednesday, March 3, 2010

Loving too much? Part 1

Is there such a thing? Loving too much?
This one is not for anyone in particular, though I know several people who can fight with me over its meaning... all I can say to them is... get rid of your chains, and feel... just feel... be brave and feel...

There is only one person in my life who knew this the way I do... the most beautiful person in my life.. even if the most cruel too... the most beautiful...

प्यार तो बस है वही
ठहराव में भी जो बहे
साँसों में घुलता ख्वाब है
हर सांस में, हर सांस में

यह बदिशें कैसी हैं कि
होगा अगर तो हो होगा यूँ
कि प्यार है तो यह करो, ऐसे करो, ऐसे कहो

आँखें छिपा पाती हैं क्या?
हवाओं में जो बह रहा
उसको रुका पाती हैं क्या?

महसूस करने पर अगर
अपनी ही तुम दीवारों की
सौ बंदिशें रख दोगे तो, फिर प्यार क्या कर पाओगे?
जीना तो सीख लोगे पर
मर के उबर न पाओगे...

तुम सोच लो, तुम हो कहाँ
रुकना कहाँ जाना कहाँ
वो जिसको मुझसे प्यार हो
उसको तो बहना आएगा...